आस ।।।
आज रूहानी हवाएँ भी मौजूद हे प्यार की सरसराहट लेकर || कुछ फूल भी खिले हे ऒस की बूंदों को बाहों में लेकर ,मगर मुझे पता ह वो ऐतबार करने आएंगे बेवक़्त ||
एक वादा टूटा मेरा वो ऐतबार करने न आये | सोचा कुछ महफिले सजाउ रंगो में ,,,में सजाउ कुछ सितारों को ,,सूरो का समां बनवाउ भवरो से ,
मगर लगता हे मुझको इनकी रंगत बड़ाने वो आएंगे बेवक़्त।।
उम्र छोटी सी हे मेरी तन्हाई हे बहुत ज्यादा ।कुछ ख्वाब अधूरे हे कुछ लब्ज भी धुंधले हे ।नजरे मिले उनसे लगता हे शायद , मगर पता हे मुझको नजरे मिलाने वो आएंगे बेवक़्त ।।
शिवम् अल्बर्ट।।।।
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